Joun Elia 1931-2002 | Karachi-Pakistan One of Pakistan's leading modern poets, known for his unconventional style. अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने -Joun Elia उस गली ने ये सुन के सब्र किया जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं एक ही तो हवस रही है हमें अपनी हालत तबाह की जाए -Joun Elia क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया -Joun Elia काम की बात मैंने की ही नहीं ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे -Joun Elia कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे कौन से शौक़ किस हवस का नहीं दिल मेरी जान तेरे बस का नहीं -Joun Elia ख़र्च चलेगा अब मेरा किस के हिसाब में भला सब के लिए बहुत हूँ मैं अपने लिए ज़रा नहीं जमा हम ने किया है ग़म दिल में इस का अब सूद खाए जाएँगे -Joun Elia ज़िंदगी एक फ़न है ल...
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